6 अगस्त और 8 अगस्त 1945, हिरोशिमा-नागासाकी, जापान – विश्व की इतिहास में यह तारीख मानवता के विरुद्ध सबसे गुरुर माने जाने वाली परमाणु शक्ति प्रदर्शन के रूप में मानी जाती है।

जापानियों के लिए तो यह आज भी मायूस कर देने वाला दिन है। परंतु जिस तरह से जापान ने उस मानवीय विपदा से ऊपर उठकर विकास की राह पकड़ी है यह भी एक बहुत बड़ी बात है। परमाणु ऊर्जा एवं तकनीकी क्षेत्र के मामलों में जापान दुनिया के मुकाबले अव्वल दर्जे पर रहने वाला देश है।

द्वितीय विश्वयुद्ध में परमाणु बम के घाव को झेल चुके जापान आज भी अपने परमाणु ऊर्जा नीति को हर किसी राष्ट्र के साथ करार करने में ठीक नहीं समझता। परंतु भारत पर विश्वास जताकर जापान ने यह बात दर्ज दुनिया को दर्शा दिया कि वह भारत को केवल एक भरोसेमंद साथी ही नहीं बल्कि एक जिम्मेदार राष्ट्र भी मानता है।

पिछले 1 साल में भारत और जापान परमाणु ऊर्जा करार और विभिन्न किस्म के व्यापारों में एक दूसरेे के करीब आ गए हैं। इसी वर्ष जुलाई में भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर और भारत में स्थित जापानी राजदूत ने इस समझौते को आगे बढ़ाते हुए पॉजिटिव कदम अपनाया है।

हाल ही में भारतीय दौरे पर आए हुए जापान के पीएम शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी के बीच खुले व्यापार और बाकी अन्य मुद्दों पर खुलकर चर्चा एवं प्रगतिशील दिशा में बातचीत हुई है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को अगर आप देखें तो आपको असली खेल समझ में आ जाएगा। इस समय एशिया में भारत सबसे ताकतवर एवं जिम्मेदार भरोसेमंद राष्ट्र भी है. दूसरी तरफ जापान भी एक आर्थिक एवं सैनिक महाशक्ति है।

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप सरकार भी यह बात अच्छी तरह से जानती है कि चीन और नॉर्थ कोरिया के विस्तारवादी पॉलिसी को एवं पाकिस्तान के आतंकवाद रणनीति को अगर कोई भेज सकता है तो उसे दक्षिण मध्य एशिया में जापान भारत वियतनाम दक्षिण कोरिया भूटान और मयनमार जैसे दोस्तों की काफी जरुरत है।

साउथ चाइना सी पर अपना कब्जा और ताकत दिखाने वाले चाइना को अब यह एहसास हो चुका है कि भारत समेत यह छोटे राष्ट्र उसके लिए अब बड़ी चुनौती हो चुके हैं जिनको अमरीका और बाकी यूरोपीय देशों का पूरा समर्थन है।

एक तरफ भारत अपनी उर्जा शक्ति को बढ़ाने के लिए जापान एवं अन्य देशों की सहायता से आगे बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ एक उभरता हुआ महाशक्ति के रूप में भी सामने आ रहा है। भारत के इस नए उभरते हुए महाशक्ति रूप का में पूरा श्रेय 2014 के बाद के भाजप सरकार एवं नरेंद्र मोदी जी को दूंगा जिन्होंने पूरे विश्व के सामने भारत को एक सम्माननीय स्तर पर लाकर पुनः एक बार इसे विश्वगुरु बनाया है।

आज उन लोगों को मुंह पर कालिख पोत लेनी चाहिए जो मोदी जी के विदेशी दौरों पर जोक्स बनाते थे एवं हंसते थे।