केरल उच्च न्यायालत के इस फैसले के लगभग सात महीने बाद, 16 अगस्त 2016 को अखिला के पिता ने एक और याचिका केरल उच्च न्यायालय में दाखिल की. इस याचिका में उन्होंने बताया कि बीते एक महीने अखिला कहां है इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

उन्होंने संदेह जताया कि जिस तरह बीते कुछ समय में केरल के कुछ युवाओं को आतंकवादी संगठनों में शामिल किया गया है उसी तरह अखिला को भी आईएस में शामिल करने के लिए सीरिया भेजा जा सकता है. उनका यह भी कहना था कि अबुबकर (जसीना और फसीना के पिता) ने अखिला का ब्रेनवाश करके उसका धर्मांतरण किया है और इस मामले में आतंवादी संगठनों की भी भूमिका हो सकती है.
अशोकन की इस याचिका का संज्ञान लेते हुए केरल उच्च न्यायालय ने स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए कि अखिला पर निगरानी रखी जाए और इस बात का ध्यान रखा जाए कि वह देश से बाहर न जाए. साथ ही न्यायालय ने सुनवाई जारी रहने तक अखिला को एक हॉस्टल में रहने के निर्देश दे दिए. लगभग 35 दिनों तक इस हॉस्टल में रहने के बाद अखिला के वकील ने न्यायालय से प्रार्थना की कि उसे अपनी इच्छानुसार रहने की अनुमति दे दी जाए. अखिला के वकील ने न्यायालय को यह भरोसा दिलाया कि हर सुनवाई पर अखिला नियमित रूप से न्यायालय पहुंच जाएगी.

ऐसे में न्यायालय ने अखिला को उसकी इच्छा के अनुसार सैनाबा के साथ रहने की अनुमति दे दी. लेकिन न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि इस बीच अगर अखिला कहीं और रहने का मन बनाती है तो उसे स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी देनी होगी.

अखिला के पिता अपनी इकलौती बेटी के अचानक हुए धर्मांतरण से तो परेशान थे ही, वे इसलिए भी चिंतित थे कि उनकी बेटी सैनाबा नाम की एक बिलकुल अनजान महिला पर उनसे ज्यादा विश्वास कर रही थी

अखिला के पिता अपनी इकलौती बेटी के अचानक हुए धर्मांतरण से तो परेशान थे ही, वे इसलिए भी चिंतित थे कि उनकी बेटी सैनाबा नाम की एक बिलकुल अनजान महिला पर उनसे ज्यादा विश्वास कर रही थी और उसी के साथ रहने लगी थी. अशोकन को अपनी बेटी की पढ़ाई की भी चिंता थी जिसके लिए उन्होंने बैंक से कर्ज भी लिया था. लिहाजा अगली ही सुनवाई में उन्होंने न्यायालय को बताया कि अखिला ने अब तक सर्जरी के उस कोर्स में दाखिला नहीं लिया है जिसे पूरा करना बीएचएमएस के हर छात्र के लिए जरूरी होता है. इस कोर्स को पूरा किये बिना अखिला एक होम्योपैथिक डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस नहीं कर सकती थी.

अखिला की पढ़ाई को लेकर उसके पिता की चिंता को न्यायालय ने बिलकुल जायज़ माना. न्यायालय ने यह भी कहा कि अखिला के भविष्य के लिए भी यही सबसे बेहतर है कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करे. अखिला के वकील को भी इससे कोई आपत्ति नहीं थी.

लिहाज़ा 19 दिसंबर 2016 को न्यायालय ने निर्देश दिए कि दो दिन बाद अखिला न्यायालय आए ताकि उसे सर्जरी के कोर्स में दाखिले के लिए उसके कॉलेज भेजा जा सके. साथ ही न्यायालय ने अशोकन को भी निर्देश दिए कि वे अखिला के सभी जरूरी प्रमाणपत्र लेकर दो दिन बाद न्यायालय आएं. अब इस मामले में 21 दिसंबर को सुनवाई होनी थी और अखिला को उसके कॉलेज भेजा जाना था. लेकिन उस दिन जो हुआ उससे इस पूरे मामले का रुख ही बदल गया.

21 दिसंबर की सुबह अखिला एक अनजान व्यक्ति के साथ न्यायालय पहुंची. न्यायालय के पूछने पर अखिला के वकील ने बताया कि यह व्यक्ति अखिला का पति है और दो दिन पहले ही सैनाबा के घर पर इन लोगों की शादी मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हो चुकी है. इस बात पर न्यायालय ने बेहद हैरानी जताते हुए सवाल अखिला के वकील से सवाल किये कि दो दिन पहले ही इस मामले की सुनवाई हुई थी और उस दिन यह तय हुआ था अखिला को उसके कॉलेज भेजा जाएगा. ऐसे में यदि उसी दिन उसकी शादी हो रही थी या होने वाली थी तो यह बात न्यायालय को बताई क्यों नहीं गई.
अखिला की अचानक हुई शादी की जानकारी मिलने के बाद न्यायालय ने इस मामले की विस्तार से जांच के आदेश दिए. इस दौरान सरकारी वकील द्वारा न्यायालय को यह भी बताया गया कि सैनाबा -जिसके घर पर अखिला की शादी हुई थी- पहले भी इस तरह के मामलों में शामिल रही है. सरकारी वकील का कहना था कि कुछ समय पहले ही एक अन्य हिन्दू लड़की का भी ठीक इसी तरह धर्मांतरण हुआ था और उस लड़की ने अपने बयान में बताया था कि सैनाबा ने ही उसे मुस्लिम लड़के से शादी करने की सलाह दी थी ताकि उसके धर्मांतरण पर कोई सवाल न उठा सके.

न्यायालय ने माना अखिला का मामला सिर्फ एक लड़की के अपनी इच्छा से धर्मांतरण और शादी का मामला नहीं लगता बल्कि इसके पीछे किसी संगठन के होने की संभावनाएं लगती हैं to be continued……

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