बेहद संदेहास्पद तरीके से हुई अखिला की इस शादी पर न्यायालय ने गहरा असंतोष जताया और इस मामले से जुड़े तमाम लोगों की जांच के आदेश स्थानीय पुलिस को दिए. साथ ही न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी होने तक अखिला को हॉस्टल भेजने के भी आदेश दे दिए. इसके बाद हुई जांच में न्यायालय ने पाया कि शफीन जहां नाम के जिस व्यक्ति से अखिला की शादी हुई है, उस पर कुछ आपराधिक मामले भी दर्ज हैं.

साथ ही न्यायालय को यह भी बताया गया शफीन पहले खाड़ी देशों में काम कर चुका है और आने वाले समय में उसके दोबारा वहां जाने की संभावनाएं हैं. ऐसे में न्यायालय ने माना कि यह मामला बहुत हद तक उसी दिशा में जाता दिख रहा है जिसकी संभावना अखिला के पिता ने जताई थी. न्यायालय ने माना कि उनका डर निराधार नहीं है कि उनकी बेटी को सीरिया भी भेजा जा सकता है.
अगली सुनवाइयों में न्यायालय ने पाया कि इस मामले में शामिल कई लोग ऐसे हैं जिन पर पहले भी जबरन धर्मांतरण के आरोप लग चुके हैं. साथ ही जिस शफीन जहां से अखिला की शादी हुई थी, वह व्यक्ति पहले कभी अखिला से नहीं मिला था.

ऐसे में न्यायालय ने सवाल उठाए कि यह शादी कैसे और किसके कहने पर अचानक कर दी गई. अखिला के घरवालों को भी इस शादी की कोई जानकारी नहीं थी. न्यायालय ने यह भी कहा कि ‘यदि कोई हिंदू लड़की किसी मुस्लिम लड़के से प्रेम-विवाह करती है तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है. ऐसे कई मामले हमारे संज्ञान में अक्सर आते हैं और अंतर-धार्मिक विवाहों को हम कभी गलत नहीं मानते. लेकिन यह मामला प्रेम-विवाह का नहीं है. इस मामले में तो अखिला उस लड़के को जानती तक नहीं जिससे उसकी शादी हुई है.’

इन तमाम बातों के अलावा न्यायालय ने यह भी गौर किया कि पूरी सुनवाई के दौरान अखिला कई बार अपनी ही बातों से पलट रही थी या गलत तथ्य न्यायालय में रख रही थी. मसलन, सर्जरी के कोर्स में दाखिले को लेकर अखिला ने पहले न्यायालय को बताया था कि उसने दाखिला ले लिया है, लेकिन बाद में न्यायालय ने पाया कि उसने कभी उस कोर्स में दाखिला नहीं लिया था. इसके अलावा अपने नाम को लेकर भी अखिला स्पष्ट नहीं थी और उसने चार बार अपना अलग-अलग नाम बताया था. किसी शपथपत्र में उसने अपना नाम हदिया बताया था तो किसी दस्तावेज में आशिया और कहीं अखिला तो कहीं अधिया. इस वजह से न्यायालय ने माना कि इस बात की प्रबल संभावनाएं हैं कि अखिला दूसरों के इशारे पर काम कर रही है.

अखिला द्वारा स्वेच्छा से इस्लाम अपनाने की बात पर भी न्यायालय ने संदेह जताया. अखिला के शपथपत्र के अनुसार इस्लामिक किताबें पढ़ने और इंटरनेट पर वीडियो देखने से उसका रुझान इस्लाम की तरफ हुआ और उसने धर्म बदलने का मन बनाया. लेकिन न्यायालय के पूछने पर ऐसी किसी भी किताब या वीडियो की विस्तृत जानकारी अखिला न्यायालय को नहीं दे पाई. साथ ही अपने इस्लाम धर्म स्वीकारने की बात को लेकर भी अखिला स्पष्ट नहीं थी. उसने न्यायालय को बताया कि 2016 में ही उसने इस्लाम अपनाया है, लेकिन न्यायालय ने पाया कि 2015 में भी उसने एक हलफनामा दिया था जिसमें उसने इस्लाम धर्म अपनाने की बात कही थी और अपना नाम आशिया बताया था.
केरल उच्च न्यायालय ने इस फैसले में कुछ ऐसे मामलों का भी जिक्र किया जिनमें न्यायालय ने पाया था कि लड़कियों का धर्मांतरण करवाने के लिए कई संगठन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं

इन तमाम बातों पर चर्चा करते हुए केरल उच्च न्यायालय ने 24 मई 2017 को अपना फैसला सुनाया और अखिला की शफीन जहां से हुई शादी को रद्द कर दिया. न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी जिक्र किया कि अखिला के धर्मांतरण से जुड़े अधिकतर लोगों में यह समानता है कि वे सभी ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया’ से जुड़े हुए हैं.

इस पार्टी पर प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं. लिहाजा न्यायालय ने माना अखिला का मामला सिर्फ एक लड़की के अपनी इच्छा से धर्मांतरण और शादी का मामला नहीं लगता बल्कि इसके पीछे किसी संगठन के होने की संभावनाएं लगती हैं. न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी लिखा कि जिन लोगों को इस मामले की जांच सौंपी गई थी उन्होंने बेहद ऊपरी तौर से यह जांच की है और कई अहम् मुद्दों को अपनी जांच में छुआ तक नहीं है.(to be continued…..)

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