अखिला के मामले में किसी संगठन के होने की बात न्यायालय ने इसलिए भी कही क्योंकि अखिला की वकालत केरल उच्च न्यायालय के कुछ वरिष्ठ वकील कर रहे थे. साथ ही अखिला ने बीच में ही अपने वकील बदले भी थे.

ऐसे में न्यायालय ने सवाल उठाए कि अलग-अलग वरिष्ठ वकीलों की मोटी फीस चुकाने के लिए अखिला की वित्तीय मदद कोई तो ज़रूर कर रहा है.

आतंकवादी संगठनों द्वारा लड़कियों को विदेश भेजने के कुछ मामलों का जिक्र करते हुए न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी लिखा कि, ‘शफीन जहां की मां खाड़ी में ही रहती हैं. वह भी वहां रह चुका है और भविष्य में वहीं लौटना भी चाहता है. ऐसे में यदि उसके ऊपर छोड़ दिया जाता तो वह अखिला को विदेश ले जा सकता था और जिस तरह अखिला के दस्तावेजों में उसका अलग-अलग नाम दर्शाया जा रहा है, यदि वह देश से बाहर चली जाती तो उसे खोज पाना भी असंभव हो जाता. ऐसी कई मामले हो भी चुके हैं जिनमें इसी तरह धर्मांतरण के बाद लड़कियों को विदेश ले जाया गया और फिर वे कभी नहीं मिलीं.’

लगभग सौ पन्नों का फैसला देते हुए न्यायालय ने अंततः अखिला को उसके माता-पिता के साथ भेज दिया. न्यायालय ने कहा कि ‘अखिला द्वारा कही गई स्वेच्छा से धर्मांतरण की बात तथ्यों से साबित नहीं होती. साथ ही अखिला अपनी पहचान को लेकर भी स्पष्ट नहीं है.

केरल उच्च न्यायालय ने इस फैसले में कुछ ऐसे मामलों का भी जिक्र किया जिनमें न्यायालय ने पाया था कि लड़कियों का धर्मांतरण करवाने के लिए कई संगठन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. इस मामले में ऐसे कुछ संगठनों की सक्रियता रही है या नहीं, इस पहलू पर जांच जारी रखने के निर्देश देते हुए न्यायालय ने अखिला को उसके पिता के साथ रहने के निर्देश दिए और साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस को भी निर्देशित किया.

यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में है. शफीन जहां (जिससे अखिला की शादी हुई थी) ने केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील दाखिल की है. यहां कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह जैसे दिग्गज वकील उसकी पैरवी कर रहे हैं. इसके चलते यह सवाल भी उठ रहे हैं कि शफीन जहां इन दिग्गज वकीलों की भारी-भरकम फीस कैसे चुका रहे हैं.

बहरहाल, सर्वोच्च न्यायालय ने भी अब तक इस मामले में लगभग वही नजरिया रखा है जो केरल उच्च न्यायालय का रहा है. सर्वोच्च न्यायालय ने अब इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी है और रिटायर्ड जस्टिस आरवी रविन्द्रन को इस जांच की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है.

एनआईए की जांच के बाद इस मामले में चाहे जो भी सामने आए, फिलहाल केरल उच्च न्यायालय के फैसले को पूरा पढ़ने पर इतना तो साफ़ है कि यह मामला जिस तरह से प्रचारित हो रहा है, इस मामले में विस्तृत जांच के आदेश दिया जाना, इसकी कलहें खुलने की दिशा में एक अहम् कदम है जो सर्वोच्च न्यायालय ने उठा लिया है..

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