हॉकी के जादूगर। यह शब्द सुनते ही जो नाम जुबान पर आता है, वह है मेजर ध्यानचंद का। अपनी हॉकी स्टिक के जादू से देश और दुनिया को चकित कर देने वाले मेजर ध्यानचंद को लेकर यू तो कई  किस्से प्रचलित है, लेकिन यह बात बहुत कम लोगो को पता होगी कि उनका नाम ध्यानचंद नहीं था। उनके नाम में “चंद” तो उनके हॉकी के प्रेम के कारण जुड़ गया।

किस्सा कुछ यूँ है कि जब मेजर ध्यानचंद ने हॉकी खेलना शुरू की थी, बचपन से तब उनका नाम ध्यान सिंह था। यह नाम उनके माता पिता ने उनको दिया था और स्कूल में भी उनका यही नाम रहा। लेकिन अपनी युवावस्था के दौर में हॉकी के प्रति जुनून के चलते उनके दोस्तों ने उनका नाम ध्यान सिंह से बदलकर ध्यान ‘चंद’ कर दिया।

दरअसल, ध्यान सिंह दिन में तो प्रैक्टिस करते ही थे, रातो में भी हॉकी स्टिक उठाते और बॉल को गोल पोस्ट में डालने की प्रैक्टिस करने लगते। मगर तब आज की तरह रात में उजाले के लिए बड़ी बड़ी फ्लड लाइट्स तो थी नहीं , इसलिए वे चांदनी रातो का इंतजार करते।  जब आसमान में पूरा चाँद होता तो मैदान सफ़ेद रोशनी से जगमगा उठता। तब चाँद की रोशनी में ही वे प्रैक्टिस करते। इसके चलते सम्मान स्वरुप उनका नाम ध्यान सिंह से ध्यान चंद पुकारा जाने लगा।

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