पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की ओर से कश्मीर में लगातार घुसपैठ करने और भारतीयों सैनिको पर हमले की घटनाये हो रही है। वर्तमान में केंद्र सरकार और भारतीय सेना के जाबांज जवान इसका मुहतोड़ जवाब दे रहे है। मगर देश ने एक समय ऐसा भी देखा था जब पकिस्तान को सबक सीखने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना को स्पष्ट आदेश देते हुए कहा था-” अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके पकिस्तान में घुसो और उसे सबक सिखायो”। आश्चर्य की बात यह है कि ऐसा कड़ा फैसला देने वाले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे, जिन्हे बहुत शांत, धैर्यवान, विनम्र ,और शांतिप्रिय माना जाता है।

किस्सा सितम्बर 1965 का है। तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री शांति के पक्षधर थे और पाकिस्तान से युद्ध नहीं चाहते थे। लेकिन पकिस्तान था लगातार भारत में घुसपैठ कर छुटपुट हमले करवा रहा था। बिगड़ैल पडोसी के इस रवैय्ये से निराश होकर शास्त्री जी भी उन भारतीय नेताओ के उस खेमे में शामिल हो गए , जो पकिस्तान को शांति से नहीं युद्ध से जवाब देना चाहते थे। पाकिस्तान ने 1 सितम्बर 1965 को अखनूर-जम्मू सेक्टर में युद्धविराम रेखा का उल्लंघन करते हुए बड़े पैमाने पर हमले की शुरुवात की थी। इससे शास्त्री जी का रहा-सहा धैर्य भी चूक गया। दो दिन बाद , 3 सितम्बर 1965 को शास्त्री जी ने तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों या सलाहों को दरकिनार करते हुए भारतीय सेना को स्पष्ट निर्देश दिए कि ” पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा लांघकर पकिस्तान में घुस जाओ। वहा हमला करो और सबक सिखाओ। ”

भारतीय सेना ने तुरंत तैयारी की और असली हमला 6 सितम्बर 1965 को हुआ। हालाँकि यह एक दिन पहले हो जाता , लेकिन भारतीय वायुसेना ने पहले पाकिस्तानी सैन्य ठिकानो पर बमबारी कर उन्हें नष्ट करने का बीड़ा उठाया।

उधर 6 सितम्बर को पकिस्तान ने, पठानकोट हवाई अड्डे पर हवाई हमला करके 13 विमानों को ध्वस्त कर दिया। यह हमला पाकिस्तान के लिए बहुत भारी साबित हुआ।

इसके बाद तो भारतीय सेना ने बिगड़ैल पकिस्तान सेना पर वो कहर बरपाया की उसे उलटे पाँव भागना पड़ा। बाद में भारतीय कमांडर्स ने कहा ऐसा कि वे ऐसा इसलिए कर पाए क्युकी सेना को शास्त्री जी का पूरा समर्थन था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तब ये जुमला बहुत प्रचलित हुआ था कि ‘भारतीय राजनीती में एक छोटे कद के आदमी ने सबसे बड़ा निर्णय लेते हुए भारतीय सेना को सबसे बड़ा निर्देश दिया’।