हामिद अंसारी ने सही बात बोली थी इस देश का मुसलमान वर्ग अपने आपको डरा हुआ महसूस करता है, भला यह भी कोई बात हुई जावेद हबीब ने अपने हेयर सैलून के प्रचार के लिए कुछ देवी देवताओं को चित्र में दिखा दिया तो कौन सी आफत आ पड़ी

पोस्टर फाड़ने दुकान बंद करवा देना और जावेद हबीब के खिलाफ एक दुष्प्रचार करना यह तो सरासर अन्याय है. यह विचार हमारे पड़ोस वाले कुमार साहब का है, मुझे आश्चर्य नहीं हुआ कुमार साहब एक बैंकर हैं अच्छी खासी तनख्वाह है और वीकेंड मनाने वाले लिबरल विचारधारा वाले हिंदू हैं. अर्पित माथुर मेरे मित्र हैं और मुंबई के उप महानगर थाने से Bjym के सचिव है.


जावेद हबीब द्वारा हिंदुओं का अपमान किए जाने पर मुझे और अर्पित जी जैसे लोगों को काफी ठेस पहुंची और यह मन मैं आया कि क्या हिंदू नपुंसक हो गए हैं जरूर कुछ कार्यवाही होनी चाहिए हो सकता है कि आप इसे गाली-गलौज या हिंसा मान ले. परंतु मैं इस हिंसा को 100% सही मानूंगा

जो हिंदू इसे गलत कहते हैं उनको अपनी मां और बहनों को किसी ब्यूटी पार्लर के मॉडलिंग चित्र एवं प्रचार में बुरी तरह दिखाए जाने पर शायद ऐतराज ना हो.

परंतु सनातन में माता-पिता एवं भाई-बहनों को भगवान का दर्जा प्राप्त है. 7/1/2015 को पेरिस में हुए चार्ली हेब्दो हमले पर शायद ही किसी मुस्लिम सेलिब्रिटी ने खुलकर बोला हो. परंतु जब बात हिंदू देवी-देवताओं की आती है तो इसे फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन से जुड़कर हमारी संस्कृतियों का अपमान किया जाता है

किसी भी देश का विकास उसकी सांस्कृतिक आधार पर निर्भर होती है, आज भगवान को ब्यूटी सैलून में दिखाया जा रहा है, आप खामोश बैठे हैं. कल महादेव को हेयर डाई करते हुए दिखाया जाएगा आप खामोश बैठेंगे. सेक्युलरिज्म और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के नाम पर आपकी संस्कृति की ऐसी तैसी हो रही है और आप नपुंसक बने खामोश बैठे हैं. मुंबई दंगे से संबंधित रजत शर्मा ने बाला साहब ठाकरे से एक बात पूछी क्या शिवसेना का हाथ मुंबई दंगों में था “माननीय बाला साहब ने तब कहा हाथ नहीं पांव था यह लोग हमें खा जाते हैं तो हम क्या चुप बैठते”

मैं भी यह बात बोलता हूं कि मुझे अर्पित माथुर और उनके साथियों पर गर्व है, कुछ लोग तो है जो हाथ में चूड़ियां नहीं पहने हुए हैं हामिद अंसारी जो डर आप बोल रहे थे. यह डर जरूरी है

ना कोई जात पात
बस हिंदुत्व की बात
जय श्री राम