हिंदी में एक कहावत है “एक मयान में दो तलवारें नहीं रह सकती” महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीति इस मुहावरे से ही जुड़ी है। किसी भी प्रदेश में राजनीतिक रूप से कई सारे पावर सेंटर होते हैं, प्रदेश की राजनीतिक एवं अन्य कार्य पद्धति इन पावर सेंटर के इर्द-गिर्द घूमती है, परंतु यह बात सबको मान्य होगी कि महाराष्ट्र में श्री बालासाहेब ठाकरे सिंगल हैंड पावर सेंटर थे।

17 नवंबर 2012 को उनके निधन के बाद एक राजनैतिक शून्यता पैदा हो गई. मराठी अस्मिता एवं कट्टर हिंदू विचारधारा को साथ में लेकर चलने वाली शिवसेना हर वक्त भारतीय जनता पार्टी पर हावी रही, परंतु श्री बाला साहब के निधन के बाद एवं नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने पर यह राजनीतिक समीकरण काफी हद तक बदल चुके हैं।

आज शिवसेना के पास बालासाहेब ठाकरे जैसा कोई करिश्माई चेहरा मौजूद नहीं है। एक जमाना था जब बाला साहब ठाकरे रिमोट कंट्रोल से महाराष्ट्र की राजनीति को संभाले हुए थे चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो उनकी काफी अच्छी पकड़ होती थी। वर्तमान राजनीति में नरेंद्र मोदी अमित शाह देवेंद्र फडणवीस एवं अन्य कई लोग भारी पड़ते हुए दिख रहे हैं।

यह बात भी जान लेनी बहुत जरूरी है की शिवसेना और बीजेपी की राजनीति हिंदुत्व से होकर ही गुजरती है और आज की वर्तमान हालात को देखें तो बीजेपी इस हिंदुत्व वाले एजेंडे को शिवसेना से छीन लेते हुए दिख रही है।

मुंबई महानगरपालिका एवं अन्य नगरपालिका चुनावों में मिली भरपूर सफलता एवं जीत से भारतीय जनता पार्टी एक और गदगद है तो दूसरी तरफ शिवसेना को अपनी गिरती हुई लोकप्रियता का एहसास हो चुका है।

यहां आपको यह भी बता दें कि महाराष्ट्र में पांच महत्वपूर्ण राजनीतिक पार्टियां हैं बीजेपी, शिवसेना , एनसीपी , कांग्रेस और मनसे. किसी भी गठबंधन के लिए यह जरूरी है की राजनेता थोड़ा फ्लेक्सिबल हो, और शिवसेना की सच्चाई सबको भली भांति पता है ,इसलिए शिवसेना किसी भी गठबंधन वाले पॉलिटिक्स में सटीक नहीं बैठती, शिवसेना द्वारा गठबंधन तोड़ देने वाली बात बीजेपी को कहना ठीक उसी तरह है जिस तरह एक चिड़चिड़ी पत्नी अपने पति को कहती है कि मेरी बातें मान लो वरना मायके चली जाऊंगी और तलाक दे देंगे परंतु करती कुछ नहीं है. नारायण राणे के बीजेपी में शामिल होने पर मैं कोई टिप्पणी या भविष्यवाणी से बचने की कोशिश करूंगा.

परंतु शिवसेना को एक आंख नभाने वाले नारायण राने से सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनका रत्नागिरी एवं रायगढ़ जिले पर बहुत अच्छी राजनीतिक पकड़ है जो किसी समय शिवसेना का गढ़ हुआ करता था. महाराष्ट्र में इस वक्त एक राजनीतिक वर्चस्व की शीत युद्ध चालू है. जीत उसकी होगी जो गठबंधन की राजनीति एवं अपनी ताकत बल पर सही समय पर समझ एवं परख पाएगा.

जय महाराष्ट्र
जय हिंद
जय शिवाजी
जय भवानी