हाल ही मैं जम्मू कश्मीर मैं हुए आर्मी और CRPF के कैंप पर आतंकवादी हमलों में यह बात पाई गई है कि म्यांमार से आए हुए रोहिंग्या मुस्लिमों का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता| क्योंकि आर्मी कैंटोनमेंट के अगल-बगल में काफी सारे रोहिंग्या बस्ती बसी हुई है|

अक्टूबर 2017 में आर्मी इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट ने अपने आला अधिकारी और सरकारों को यह बातचीत आया था कि मनमाड से आए हुए रोहिंग्या मुस्लिम भविष्य में एक सर दर्द साबित होने वाले हैं| उसके बाद सरकार ने कदम तो उठाएं परंतु जो कार्रवाई सख्ती से की जानी चाहिए थी इतनी सख्ती से नहीं की गई| नतीजा यह हुआ कि आर्मी कैंप पर हुए।

आतंकवादी हमलों कि जब जांच हुई तो यह पाया गया कि सीमा पार पाकिस्तान में बैठे हुए लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत विरोधी आतंकवादी संगठन के तार अब जम्मू कश्मीर में स्थित शरणार्थी रोहिंग्या मुस्लिमों से जुड़ रहे हैं, और अगर इस बात को अभी भी हल्के में लिया गया तो अकेले जम्मू कश्मीर में हजारों की संख्या में बसे हुए रोहिंग्या मुस्लिम की वजह से एक नया खतरा पैदा हुआ दिख रहा है| यहां सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात मुझे आज तक समझ में नहीं आई कि धारा 370 और 35 ए के तहत अगर जम्मू कश्मीर एक विशेष राज्य के दर्जे में आता है और अन्य किसी बाहर के लोगों को यहां पर शरण नहीं दिया जा सकता तो आखिर रोहिंग्या मुस्लिमों का इतना बड़ा डेरा यहां पड़ा कैसे?

बड़ी ही निराशाजनक स्थिति है कि हम लोग सेकुलरवाद के ऐसे नकाब उड़ चुके हैं कि इस्लामिक आतंकवाद का चेहरा नहीं समझ पाते| जहां एक और अपने ही प्रदेश के रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं को अत्याचारी लोगों ने बड़ी बेरहमी से मार कर जम्मू कश्मीर से निष्कासित कर दिया| और आज भी उन कश्मीरी हिंदुओं को कश्मीर में नहीं रहने दिया जाता, परंतु रोहिंग्या मुस्लिमों का स्वागत किया जा रहा है जो कि इस देश के नागरिक भी नहीं है| समझ में नहीं आता कि देश में हिंदू कब तक गांधारी की तरह आंखों में पट्टी बांधकर रहेंगे और सच को अस्वीकार करेंगे? इस्लामिक कट्टरवाद और आतंकवाद पूरी तरह से देश में दस्तक दे चुका है और हमारी संस्कृति कि खात्मा के लिए तैयार है| अब तो जाग जाओ|