अटल बिहारी वाजपेयी विलक्षण वक्त व गजब के हाजिर जवाब  है। वे जब जब जनता के बीच भाषण देने या सांसदों के बीच सवालो के जवाब देने खड़े हुए, उन्होंने सबको चुप कर दिया।

ऐसा ही एक वाकया है, जिसमे संसद में कुछ सांसदों ने गुट बनाकर अयोध्या मुद्दे पर उन्हें घेरने की कोशिश की थी, मगर अटल जी ने अद्भुत हाजिर जवाब के साथ ये घेराबंदी तोड़ते हुए विरोधियो को मुहतोड़ जवाब दिए।

किस्सा सं 1998 का है। तब मार्च में अटलजी के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी थी। 10 जून को राज्यसभा में बतौर प्रधानमंत्री बोल रहे अटलजी को घेरने के लिए सांसद जलालुद्दीन अंसारी ने प्रश्न उठाया कि ‘अयोध्या में रात के अँधेरे में पत्थर तराशे जा रहे है। क्या यह मंदिर  बनाने की तैयारी है?’

अंसारी की मंशा थी कि अटलजी दवाब में आ जाये और ऐसा कुछ बोल दे, जिसे मुद्दा बनाया जा सके। अटलजी अंसारी और उनके समर्थक सांसदों की इस चाल को ताड़ गए।

वे खड़े हुए और बोले -‘पत्थर तराशे जा रहे है,खंभे तैयार हो रहे है, खुले में , दिन के उजाले में हो रहा है कोई पर्दा या अँधेरे में नहीं, अवगुंठन में नहीं।’ उनकी तल्खी देखकर सब चुप हो गए।

अटलजी फिर बोले -‘जो लोग मूर्तियों तराश रहे है ,उनके मन में आशा होगी कि कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आएगा, इसलिए वे अपना काम कर रहे रहे है। मै, आप या संविधान भी उन्हें ऐसा करने से नहीं रोक सकता।’ अटलजी के इस बयान से सबको सांप सूंघ गया। उन्होंने अपनी बात भी कह दी और सबको चुप भी कर दिया।