अयोध्या में जमीन विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट 4 जनवरी को अहम सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट उस अर्जी पर सुनवाई करेगा, जिसमें इस पूरे मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जनवरी माह तक टाल दी थी। इससे पहले तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस अशोक भूषण और अब्दुल नज़ीर मामले को सुन रहे थे।

इस मामले को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया है। पीठ के इस मामले में सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन करने की संभावना है। चार दीवानी वादों पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ 14 अपील दायर हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था।

सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारुकी के फैसले में पुनर्विचार के लिए मामले को संविधान पीठ भेजने से इंकार कर दिया था। मुस्लिम पक्षों ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का जरूरी हिस्सा न बताने वाले इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को कहा कि भाजपा का मत है कि उच्चतम न्यायालय को राम मंदिर मामले की रोजाना सुनवाई करनी चाहिए ताकि जल्दी फैसला आ सके, जावड़ेकर ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘ हमारी इच्छा है कि इस मामले की रोजाना सुनवाई हो ताकि जल्द फैसला आ सके।’’

उल्लेखनीय है कि हिन्दुवादी संगठन 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अदालत के फैसले की प्रतीक्षा किये बिना अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने की सरकार से मांग कर रहे है।

भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने पिछले महीने अयोध्या में पूर्जा अर्चना का एक कार्यक्रम आयोजित किया था। भाजपा ने अभी तक राम मंदिर के विषय पर कानून लाने के संबंध में अपना रूख साफ नहीं किया है। 

बहरहाल, जावड़ेकर ने सरकार पर जासूसी करने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस बारे में परिपत्र में कुछ नया नहीं है और यह बात कांग्रेस के समय में ही आ चुकी है।