न्यायालय के रोज चक्कर काट रहा हूं, इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा हूं, आंखों पर काली पट्टी बांधे हुए इंसाफ की देवी, तेरे इस कानूनी किताब के नाइंसाफी पर रो रहा हुँ। कानून के हाथों मजबूर एक आम हिंदू बोल रहा हुँ। ये उस आम हिंदू की पुकार है जो न्यायालयों के हाथों विवश बैठा है| और दिन प्रतिदिन अपनी हिंदू संस्कृति और धर्म को न्यायालय के निर्णय से आहत होता हुआ देख रहा है|

अब सर्वोच्च न्यायालय को केंद्रीय विद्यालयों में होने वाले प्रार्थना पर भी आपत्ती होने लगी| ऐसे में कई सारे सवाल मिलार्ड जज साहब पर तो उठना बनता ही है| जज साहब संक्रांति आ रही है अब पतंगों पर भी प्रतिबंध लगा दीजिए|

गणेश विसर्जन हो या अमरनाथ में बम बम भोले की जयकार सब पर आपका चाबुक चल गया| जलीकट्टू और बैल की रेस पर आप की पैनी नजर पड़ गई|परंतु आप बकरीद और अजान की आवाज पर इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर पर मौन रहे|

मुंबई में होने वाली गोविंदा गोपाल कला त्योहार पर आप की नजर पड़ गई, परंतु छप्पन छुरी वाले मोहर्रम के खूनी खेल पर आप मौन रहे| मुसलमानों और ईसाइयों की भावनाओं का बराबर ख्याल रखने वाले जज साहब, जब हिंदू के देवी देवताओं का अपमान हुआ तो आप मौन रहे|

अफजल गुरू, याकूब मेमन और कसाब जैसे इस्लामिक आतंकवादी निर्दोषों की हत्या कर गए, परंतु आतंकवाद का धर्म नहीं मालूम पड़ा, और बेकसूर साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के नाम पर हिंदू आतंकवादी बन गया मगर न्यायालय के देवता आप मौन रहे| हजारों वर्षों से गुलामी की जंजीरों में जकड़ा यह भारत का हिंदू आज हर किसी से यह सवाल करता है| 1947 मैं जब भारत धर्म के नाम पर बंटा मुस्लिमों को पाकिस्तान मिला तो हिंदुओं को क्या मिला? सेक्यूलर प्रदेश| एक ऐसा देश मिला जहां हिंदू की भावनाओं के साथ सदैव राजनीतिक कारणों से खिलवाड़ की गई| परंतु अन्याय के खिलाफ जब भी देश के न्यायालयों में हिंदुओं ने आवाज उठाई तो बदले में हमें क्या मिला? अपने ही देश में धर्म के आधार पर मुझ पर अन्याय हुए मुझे मारा गया और कश्मीर से निकाला गया परंतु यहां की न्यायालय जिसका दायित्व था मुझे इंसाफ दिलाना, उसी न्यायालय ने मेरे साथ अन्याय किया, परंतु मैं आतंकवादी नहीं बना|

जिस भारत की पहचान हिंदू संस्कृति से होती है और राम से होती है उसी देश में मेरे इष्ट देव राम तंबू में रहने पर विवश है, परंतु धर्मनिरपेक्षता की आड़ में सोई हुई न्यायालय मेरी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते जा रही है और आज तक राम मंदिर नहीं बना| ठीक है सरकार है राजनीति तो होती है, शासन और प्रशासन से सताया हुआ यह हिंदू अगर न्यायालय के पास न्याय मांगने जाएं तो अब ऐसा लगता है कि न्यायालय भी इसी गंदी सेक्युलर राजनीति की शिकार हो चुकी है| और शायद न्यायालय को अब हिंदू की पुकार सुनाई नहीं देती| इसलिए ऐसा लगने लगा है कि शायद इस देश में हिंदू होकर जन्म लेना ही पाप हो गया है|