अभी कुछ दिन पहले इंडिया कॉन्क्लेव में सोनिया गांधी ने कहा कि हम कैसे भी करके 2019 में मोदी को पीएम बनने से रोक लेंगे|

इस बात पर मेरी एक भाजपा समर्थक मित्र से बहस हो गई उनको सोनिया गांधी की बात पर घोर आपत्ति हुई कि ऐसे कैसे एक चुने हुए प्रधानमंत्री को गैर संवैधानिक तरीके सोनिया गांधी हटाने की बात कर सकती है? मैंने उनको समझाया कि देखिए सोनिया गांधी बिल्कुल सही कह रही है वह कांग्रेस की मानसिकता को दर्शा रही है इसमें चौंकने वाली बात क्या है? मैंने बोला कि सोनिया गांधी का मतलब था कि हम दंगे करवाएंगे चाहे कुछ भी खेल खेलेंगे परंतु भाजपा को सत्ता में आने से रोकेंगे| यहां दिक्कत सिर्फ मेरे मित्र की नहीं परंतु कई सारे भाजपा समर्थकों की है| न जाने क्यों वह कांग्रेस से यह अपेक्षा करते हैं कि वह एक साफ-सुथरी और अच्छी राजनीति करेगी|

चाहे 1947 में देश का बंटवारा और उस के दौरान हुए दंगे हो, भागलपुर दंगे ,1984 के सरदारों के खिलाफ दंगे, या फिर मुंबई के आजाद मैदान में हुए दंगे, और वर्तमान की बात करें तो गुर्जर आंदोलन जाट आंदोलन करणी सेना आंदोलन हो या दलित आंदोलन, हर आंदोलन के पीछे दंगे और उन रंगों के पीछे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस का हाथ हमेशा से रहा है| तो बंधु इसमें आश्चर्य करने वाली कोई बात नहीं है| कांग्रेस कार्यों से मैं वाकिफ हूं और मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं है| समस्या कांग्रेस से ज्यादा देश के लोगों की सोच की है जो इस राजनीति को समझे बगैर बहकावे में आ जाते हैं| समस्या कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के उन समर्थकों की है जो राजनीति के इस लड़ाई में यह चाहते हैं कि भाजपा बिना छल कपट की राजनीति करें|

ऐसे समर्थकों को एक बात वापस मैं समझा दूं कि महाभारत में जयद्रथ को भगवान श्री कृष्ण ने छल से मरवाया था| क्योंकि अगर जयद्रथ नहीं मरता तो अर्जुन अग्नि में समा जाते हैं| और अधर्म की जीत हो जाती है| यह राजनीति है बिना छल और कपट से परे नहीं रह सकते| मैंने देखा था कई सारे भाजपा समर्थक नरेश अग्रवाल के भाजपा में शामिल होने पर घोर आपत्ति जता रहे थे| यहीं समर्थक अब कांग्रेस की दंगा वाली राजनीति के ऊपर चीख़ पुकार कर रहे हैं|

आप पूछेंगे कि अब समर्थक होने के नाते हम क्या करें? आपने एक बात पर गौर किया होगा कि अक्सर मीडिया के न्यूज़ चैनल सरकार को बदनाम कर रहे हैं और उसके द्वारा किए हुए विकास के कामों को नहीं दिखाते| यहां भी रोने की जरूरत नहीं क्योंकि मीडिया है और मीडिया सेंसेशनल न्यूज़ पर चलती है| तो कृपया सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें और जमीन पर जाकर हर एक आम नागरिक को बताएं कि किस तरह से सरकार विभिन्न विभागों में अपने काम किए जा रही है और अगर किसी को कुछ समस्या हो तो उसके निवारण हेतु उसकी मदद करें| अगर आपको शंका हो की कोई न्यूज़ चैनल या अन्य कोई भी वेबसाइट सरकार के खिलाफ कोई खबर बना रही है तो कृपया उसको जांचें और सही आंकड़ों के के साथ ऐसे मीडिया चैनलों की हवा उड़ाएं|

यहां एक तरफ वोट बैंक की राजनीति को समझना भी काफी आवश्यक है| 2014 में भाजपा को करीब 35% मतदान मिले| जिसमें एक बड़ा वर्ग कांग्रेस से हताश युवा था और दलित ओबीसी वर्ग भी| 2017 में हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की| उसमें सबसे गौर करने वाली यह बात थी कि दलित और ओबीसी मतदाताओं में पूरी तरह से भाजपा पर अपना भरोसा दिखाया| यह बात विपक्ष को खल गई और उसने शुरू किया दलित की घिनौनी राजनीति | और इसकी शुरुआत हुई गुजरात विधानसभा चुनावों में जहां जिग्नेश मेवाणी को प्रयोग किया गया और वह कुछ हद तक सफल माना जा सकता है|

दलित और ओबीसी मतदाताओं मैं भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस ने शुरु कर दी दंगों की राजनीति| क्योंकि विकास के मुद्दे पर 2019 का चुनाव जितना कांग्रेस की बस की बात नहीं| 60 साल से सत्ता में काबिज रहे कांग्रेस ने दलितों के उद्धार के लिए खुद तो कुछ नहीं किया परंतु एक बड़ा वोट बैंक ही खिसकता देख अब उनको दलितों की चिंता हो गई है। दलित उत्पीड़न के मामलों में आप यह कांग्रेस के सरकार के जमाने के आंकड़े भी जरा देख लें|

मैं आशा रखता हूं कि भाजपा का थिंक टैंक अपने समर्थकों में विश्वास जगाऐग् और इस घिनौनी राजनीति का पर्दाफास करेगा| क्योंकि अगर ऐसा करने में अगर हम असमर्थ रहे तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इतना गिर जाएंगे कि वह देश को आंतरिक कलह की ओर मोड़ देंगे| आप सभी से निवेदन है कि एक आम नागरिक होने के नाते अपने प्रधानमंत्री और सरकार पर विश्वास बनाए रखें और देश की एकता और अखंडता में अपना योगदान करें|