8 नवंबर 2016 को घोषित नोटबंदी को डेढ़ साल बीत चुका है। नोटबंदी को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आई हैं।किसी को इससे परेशानी का सामना करना पड़ा तो वहीं कुछ लोगों ने इसे अच्छा कदम बताया।

लेकिन, अब जो आंकड़ा निकलकर सामने आ रहा है वो यकीनन केंद्र सरकार के लिए अच्छी खबर है। इस डेढ़ साल के दौरान कैशलेस ट्रांजैक्‍शन में लगभग 60 फीसदी का इजाफा हुआ है।

इसमें से सबसे बड़ी हिस्‍सेदारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड से हो रही खरीददारी की है। इससे साफ है कि नोटंबदी के बाद से लोगों का रुझान डिजिटल लेनदेन की तरफ बढ़ा है।

 

RBI की रिपोर्ट में खुलासा 

मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर यह है कि नवंबर के बाद से लगातार इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रांजैक्‍शन बढ़ी है, इससे सरकार के कैशलेस इकोनॉमी बनाने के सपने को भी बल मिला है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2018 में 109 करोड़ 80 लाख इलेक्‍ट्रॉनिक पेमेंट ट्रांजैक्‍शन हुई हैं, जबकि नवंबर 2016 में 67 करोड़ 15 लाख ट्रांजैक्‍शन हुई थीं, हालांकि, जनवरी 2018 में रिकॉर्ड 112 करोड़ 23 लाख ट्रांजैक्‍शन हुईं थीं।

 

डेबिट/क्रेडिट कार्ड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल

डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल काफी समय से हो रहा है। खासकर नौकरीपेशा लोग इसका इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। लेकिन, नोटबंदी के बाद से अचानक इसके इस्तेमाल में तेजी आई है। आरबीआई की रिपोर्ट में दिया गया है कि कुल कैशलेस ट्रांज़ैक्शन में कार्ड्स की हिस्सेदारी 22 फीसदी है। मार्च 2018 में 24 करोड़ 71 लाख ट्रांजैक्‍शन पीओएस मशीन पर डेबिट व क्रेडिट कार्ड से हुई हैं।

 

किस माध्यम से कितनी हुई ट्रांजैक्शन

ट्रांजैक्शन हिस्‍सेदारी
कुल ट्रांजैक्‍शन 109.80 करोड़
डेबिट/क्रेडिट कार्ड 24.71 करोड़
NACH (नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस) 19.91 करोड़
UPI 17.12 करोड़
USSD 15.61 करोड़
PPI 11.31 करोड़
मोबाइल बैंकिंग 10.25 करोड़
IMPS 9.92 करोड़
CTS 9.18 करोड़

 

तेजी से बढ़ रही UPI ट्रांजैक्शन

सरकार ने नोटबंदी के बाद यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस (UPI) की शुरुआत की थी। इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भीम ऐप भी लॉन्च किया, साथ ही सभी बैंकों की मोबाइल/इंटरनेट बैंकिंग को इससे जोड़ा। यूपीआई के चलन का असर अब पूरी तरह दिख रहा है। RBI के मुताबिक, नवंबर 2016 में जहां लगभग 3 लाख ट्रांजैक्‍शन यूपीआई से हुई थीं, वहीं मार्च 2018 में यह बढ़कर 15 करोड़ 17 लाख तक पहुंच गई हैं।

 

ऐप और वॉलेट से भी बढ़ा लेनदेन
देश में 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी। उसके बाद से ही डिजिटल लेनदेन बढ़ रहा है। संसद के वित्त स्थायी समिति को सौंपी गई एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि UPI-BHIM, आईएमपीएस, एम-वॉलेट और डेबिट कार्ड के जरिए लोग पहले से ज्यादा डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि रोजमर्रा के कामकाजों में डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ा है।

 

कैशलेस इकोनॉमी का सपना होगा पूरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के दौरान कहा था कि देश को कैशलेस इकोनॉमी की तरफ ले जाना है। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी बार-बार इसकी तरफदारी करते नजर आए। इसके लिए सिस्टम में कैश का इस्तेमाल कम किया जाए। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट से मोदी सरकार के इस सपने को बल मिलता दिख रहा है। क्‍योंकि, नए नोट या यूं कहें कि कैश आने के बाद भी लोग लगातार कैशलेस ट्रांजैक्‍शन को तवज्जों दे रहे हैं।