पिछले साल 8 नवंबर को ही शाम आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबको चौंकाते हुए 500 और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य ठहराते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था। बीजेपी और  केंद्र सरकार के सदस्य नोटबंदी देशहित में बताते हैं तो विपक्षी दल इसे देश का काला फैसला ठहराते हैं। अगर एक आम नागरिक के नजरिए से देखें तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि नोटबंदी आजाद भारत में लिया गया सबसे बड़ा आर्थिक फैसला है।

नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर आइए इसके फायदे पर नजर डालते हैं। यहां नोटबंदी के फायदे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय की ओर से बताई गई बातों पर आधारित हैं। हम आपको ऐसे बातें बता रहे हैं जो साबित करती हैं कि नोटबंदी से क्या फायदा हुआ।

 नोटबंदी से ये हुए फायदे

  • नोटबंदी के बाद के एक साल में बैंकों ने ब्याज दरों में 1 फीसदी तक की कटौती की, डिपॉजिट रेट में भी 0.2 फीसदी तक की कटौती की गई।
  • नोटबंदी के बाद एक जनवरी को भारतीय स्टेट बैंक ने आश्चर्यजनक रूप से धन की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर में 0.9 प्रतिशत कटौती की थी, इसके बाद दूसरे बैंकों ने भी ऐसा ही किया।
  • नोटबंदी के दिन आठ नवंबर 2016 को बंद किये गये नोट की कुल राशि 15.44 लाख करोड़ रुपये थी। इनमें से 15.28 लाख करोड़ रुपये यानी 99 प्रतिशत धन बैंकों में पहुंच चुका है,  इसके बाद अब करीब 16,000 करोड़ रुपये की राशि बैंकिंग तंत्र से बाहर रह चुकी है।
  • 4 अगस्त 2017 तक नकद ट्रांजैक्शन 17.77 लाख करोड़ से घटकर 14.75 लाख करोड़ पर आया।
  • नोटबंदी के बाद अब केवल 83 फीसदी नकदी प्रभावी रूप से सर्कुलेशन में है।
  • नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा मिला, अक्टूबर तक साल भर में हर महीने औसतन 136-138 करोड़ रुपए के डिजिटल लेनदेन हुए।
  • टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या में 25.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, 56 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े, 2016-17 में टैक्स रिटर्न 2.79 करोड़ के पार पहुंचा, जो 2015-16 में 2.23 करोड़ रहा था।
  • 17.92 लाख ऐसे लोगों की पहचान हुई जिनके बैंक अकाउंट में डिपॉजिट रकम का मेल उनकी आय से नहीं हुआ।
  • नोटबंदी के बाद महज 45 दिन में जनधन खातों में रकम बढ़कर 87,100 करोड़ रुपए हुई।
  • कर्ज सस्ता हुआ है, इस दौरान कर्ज पर ब्याज दर में करीब एक प्रतिशत की कमी आई है।
  • प्रधानमंत्री कार्यालय ने नोटबंदी के फायदों में यह भी कहा कि इससे रीयल एस्टेट के दाम कम हुये हैं, इस दौरान देशभर में शहरी स्थानीय निकायों का राजस्व करीब तीन गुणा तक बढ़ गया, नोटबंदी के दौरान उपभोक्ताओं को उनके बकाये का भुगतान बंद किये गये नोटों में करने की अनुमति दी गई।
  • उत्तर प्रदेश में शहरी स्थानीय निकायों का राजस्व चार गुणा बढ़ गया जबकि मध्य प्रदेश और गुजरात के निकायों का राजस्व करीब पांच गुणा तक बढ़ गया।
  • भुगतान के डिजिटल तरीके के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय ने आगे कहा कि अगस्त 2017 में डेबिट कार्ड के जरिये लेनदेन 50 प्रतिशत बढ़कर 26.55 करोड़ रुपये तक पहुंच गया जबकि एक साल पहले इसी माह में यह 13.05 प्रतिशत ही बढ़ा था, डिजिटल भुगतान का मूल्य भी इस दौरान 48 प्रतिशत बढ़कर 35,413 करोड़ रुपये हो गया।
  • नोटबंदी के बाद काफी हद तक नक्सल और आतंकी हरकतों पर भी लगाम लग सके हैं।

ऐप बेस्ड ट्रांजैक्शन में तेजी आई

  • UPI-BHIM से नवंबर 2016 में 0.1 लाख, अक्टूबर 2017 तक 23.36 लाख रुपए
  • AEPS से नवंबर 2016 में 12.06 लाख, अक्टूबर 2017 में 29.08 लाख रुपए का ट्रांजैक्शन
  • IMPS से  नवंबर 2016 में 8.96 लाख, अक्टूबर 2017 में 32.42 लाख रुपए का ट्रांजैक्शन
  • एम-वॉलेट से नवंबर 2016 में 46.03 लाख, अक्टूबर 2017 में 72.72 लाख रुपए का ट्रांजैक्शन

डिजिटल ट्रांजैक्शन का फायदा

  • 2017-18 में डायरेक्ट बनिफिट ट्रांजैक्शन के जरिए 6.28 लाख करोड़ रुपए दिए गए।
  • अक्टूबर 2016 में जहां PoS मशीन 15 लाख थीं, वहीं अगस्त 2017 में ये बढ़कर 29 लाख हुईं।
  • 78% बैंक खाते मोबाइल से जोड़े गए, 73% बैंक खातों को आधार से लिंक किया गया।
  • नोटबंदी के बाद करीब 2.24 ऐसी कंपनियों को बंद कर दिया गया, जिन्होंने 2 साल से कोई भी कामकाज नहीं किया, साथ ही 3 लाख डायरेक्टरों को अयोग्य घोषित किया गया।