आज संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है। ऐसे में हमें यह भी याद रखना चाहिए कि भारत आज जैसा है, उसे वैसे बनाने में बाबासाहेब का कितना महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

संविधान निर्माण के अलावा भी एक योगदान ऐसा है, जिसने आजादी के पहले से आज तक हर नौकरी पेशा,कामगार या मजदूर के जीवन को प्रभावित किया है। और वह योगदान था दिन में काम के घंटो को 12- 14 से घटाकर 8 करवाना।

यह किस्सा उस दौर का है, जब देश में अंग्रेजो का शासन था और देश में ब्रिटिश सत्ता की और से शीर्ष व्यक्ति होते थे वायसराय।

तब प्रशासनिक कामकाज संचालित करने के लिए वायसराय की एग्जीक्यूटिव कॉउन्सिल होती थी। जिसमे अलग अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते थे जो वायसराय को सलाह देते थे। उसी आधार पर प्रशासनिक नीतियां बनती थी।

गठन के कई साल बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर को उनकी बुद्दिमत्ता, गहन अध्ययन और प्रखर सोच के चलते वायसराय की एग्जीक्यूटिव कॉउन्सिल में श्रम सदस्य नियुक्त किया गया था।

तब उन्होंने सबसे अहम् सलाह यह दी थी कि ‘काम के घंटे 12-14 से घटाकर 8 घंटे कर दिए जाये’

अंग्रेजो ने ना नुकुर की. लेकिन बाबासाहेब ने इतने प्रखर तर्क दिए कि कॉउन्सिल की चल न सकी। अंततः यह नियम बन गया। आज भी यदि आप 12-14 घंटे के बजाये 8 घंटे की काम कर छुट्टी पा लेते है ,तो बाबासाहेब को धन्यवाद दीजिये।