पूछती है यह अयोध्या नगरी हर सनातनी हिंदू से कब तक धक्के रखोगे श्रीराम को बस तंबू से. जी हां हमारी श्रीराम सिर्फ मर्यादा पुरुषोत्तम ही नहीं हमारे मन की आस्था एवं भारत भूमि की गौरव ता का प्रतीक है।

वर्ष 1990 जब कई हिंदू कार्यकर्ता उस समय की उत्तर प्रदेश की इस्लामिक मुलायम सरकार द्वारा हजारों लोगों को क्रूरता से मार दिया गया. वर्ष 1527 मुगल इस्लामिक शासक की बर्बरता का शिकार हुई इस अयोध्या नगरी ने तब से अब तक लाखों हिंदुओं के शहादत देखी है. तो सब का यही सवाल है क्या “राम मंदिर का सपना अब होगा अपना”।

कई हिंदू भाई अब यह सवाल खुलकर पूछ रहे हैं, और पूछेंगे भी क्यों ना, आज देश में एक ऐसी सरकार है जो देश विदेश में हिंदू सनातन एवं परंपरा का गौरव और अभिमान बढ़ा रही है।

तो फिर हर किसी के मन में यह वाक्य मिलता बढ़ जाती है कि शायद अब राम मंदिर बन जाए.
तो आइए मैं आपको क्रमशः इसकी एक छोटी गुत्थी सुलझाने की कोशिश करता हूं।

1) 30/9/2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा यह बात मंजूर कर लेना की ध्वस्त की हुई बाबरी ढांचा पर पहले राम मंदिर ही था और अयोध्या में राम का जन्म हुआ था. राम मंदिर के निर्माण हेतु एक तिहाई जमीन दिए जाने के संकेत।

2) 16 मई 2014 संपूर्ण देश व द्वारा ऐतिहासिक रूप से एक राष्ट्रवादी हिंदुत्ववादी व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुनकर देना।

3) 11 मार्च 2017 को भारत द्वारा उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत हासिल करना।

4) 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के शपथ लेना।

5) अभी तक राम मंदिर मुद्दे पर योगी जी एवं मोदी जी ने कभी कोई भी नेगेटिव प्रतिक्रिया नहीं दी है।

यहाँ पे आपको यह बात बता दु की जबसे उत्तर प्रदेश मैं योगी सर्कार बनी है तबसे विकास की राह और कानुन व्यवस्था मैं काफी अच्छा सकारातं कदम कीए हुवे है।

आयोध्या नग्री मैं खुद गया हूँ, एक वक़्त की बेहाल बीमार पडे आयोध्या मैं अब विकास की काम और बिजली रोड की ज़रूरी सुविधा जोर पे है, अब ज़रा विचार करिये राम लला की नग्री मैं राम मंदिर निर्माण करने से पहले की सुविधा कीए जाने चाईये की नहीं।

दुसरी और बाबरी धांचा जो एक शिया लोगो की मासजीद है। अब वो शिया लोग भी राम मंदिर की सपोर्ट मैं अगये है। सीफ कुछ लोग है जो राजनीतिक कारन से मुस्लिम वोट बैंक की लिए अब उनसे भी नीपट लीया जा रहा है।

आयोध्या मै फिर से शिला निर्माण, सर्यू पूजां और बंध कीए हुवे राम लीला को फिरसे शुरू करना हर तरह से एक संकत देते है. यहाँ आप यह भी जान लिजिये की गोरखनाथ की पूर्व स्वार्गिये महांत श्री आविध्यनाथ राम मंदिर आंदोलन की अग्रसार शामिल थे और मुख्यमंत्री योगीजी उनके शिश्य है. इशारों को समज लीजिये।

बस इंतेजार है कोर्ट की आदेश की। और आप यह भी समज लिजिये की कोर्ट की बाहर भी रास्ते बन सकते है और इस की लिए मोदी योगी और अमित शाह बहोत चतुर है। इसके आगे कहने की ज़रूरत नहीं।

जय श्री राम
हर हर महादेव