हे भारतवासी, एक बात समझ में नहीं आती है कांग्रेस से जुड़े हुऐ उपराष्ट्रपति हो या राष्ट्रपति, जब पद पर विराजमान होते हैं तो देश का स्थिति सामान्य होती है, लेकिन सेवानिवृत होते ही आँसु गिराकर जार जार क्यों रोने लगते हैं?

आज पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने, सेवानृवित होते ही, बाल्टी भर के आँसु गिराया और जार जार रोते हुऐ कहा, हाय अब भारतवर्ष विभाजन की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने ये भी कहा देश के ध्रुवीकरण को देखकर उनके हृदय के हज़ार टुकड़े हो गये। देश का ऐसी दशा देखकर वो सुबह शाम रोज़ लोटा भरकर आँसु गिराते हुऐ रोते ही रहते हैं, ना उनसे ख़ाया जाता है ना ही उनसे पानी पिया जाता है। देश की ये दुर्दशा देखकर अब वो चुप नहीं बैठेंगें।

माननीय पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, जब आप भारत के संविधान के सर्वोच्च पद पर कार्यरत थे, और आपके हाथों में देश की दशा और दिशा बदलने का Power था, तब आप निद्रावस्था मे थे या मुंगफली छिलकर खाने व्यस्त थे। आपके पद छोड़ने के तुरंत बाद ऐसा कौन सा पहाड़ टूट गया? कांग्रेसी सोच का “बोलने का आज़ादी का उपयोग” तब तक नहीं होता है जब तक वो देश को बेशर्मी से बदनाम ना कर ले।

इसके पहले अगस्त के महीने मे पूर्व उपराष्ट्रपति मुहम्मद हामिद अंसारी ने अवकाश प्राप्त करते ही अपने दोनों हाथों से छाती कूटना शुरू किया और कहा देश में मुसलमान डरे हुऐ हैं। कमाल है भारतवर्ष में हिंदुओं को औरतों और बच्चों समेत ट्रेन में पेट्रोल छिड़कर मुसलमानों द्वारा ज़िंदा जला दिया जाता है, दक्षिण भारत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या करके अमानवीय रुप से उनके अंग काटकर सरेआम सड़कों पर फेंक दिया जाता है फिर भी इस देश का हिंदु उफ़ नहीं करता।

हे कांग्रेस के मगरमच्छ के आँसु, तुम्हारे फ़रेबी आँसु, तुम्हारा pseudo secularism के नाम पर छाती कूटना भारतवर्ष के लोगों को समझ में आने लगा है….