“अगर मेरी चादर मैली तो तुम्हारी चादर सफ़ेद कैसे? आओ तुम्हारी चादर भी मैली कर दें।”

कुछ यही हाल आजकल कांग्रेसियों का है उनको यह बात हजम तो नहीं हो रही फिर उनके जमाई राजा पर सौ सौ आरोप लग रहे हैं| किसी झगड़ालू पड़ोसी की तरह कांग्रेसियों ने भी कह दिया कि मेरा दमाद अगर घपलेबाज है तो तेरा बेटा कौन से दूध का धुला है?

ताजा आरोप “द वायर” के माध्यम से कांग्रेसी और मुख्य विपक्षी दलों नें किसी और पर नहीं बल्कि ‘विपक्षी दलों के विनाशक’ कहे जाने वाले अमित शाह के परिवार पर| समाचार पत्रिका द वायर के मुताबिक 2013 14 में अमित शाह के सुपुत्र जय शाह के कंपनी की टर्नओवर मात्र ₹50000 सालाना थी जो 2014 से 2016 के दौरान ₹16000 गुने बढ़कर 80 करोड़ के करीब पहुंच गई है|

द वायर के मुताबिक KIFS नामक नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी ने जय शाह के कंपनी Temple Enterprise को करीब ₹18 करोड़ की अनसिक्योर्ड राशि क़र्ज़ के तहत दी है| KIFS के मालिक राजीव खंडेलवाल रिलायंस इंडस्ट्रीज में सीनियर एक्जीक्यूटिव है और राज्यसभा सांसद भी है| समाचार पत्रिका ने इसे बदनाम करने के लिए यह बात सामने रखा है कि जय शाह ने अपने पिताजी के राजनीतिक रसूख के चलते हुए यह सब लोग इकट्ठे हुऐ और भारी मुनाफा कमाया।

अब जब वार अमित शाह पर हुआ है तो जवाब भी अमित शाह टाइप का ही मिलेगा| जय शाह ने द वायर पर 100 करोड़ का मानहानि का मुकदमा ठोक दिया है| यहां आप को जान लेना चाहिए कि द वायर को मुख्य रुप से फंडिंग देने वाले कौन-कौन है इनके नाम इस प्रकार हैं:

  • रोहन मूर्ति, नारायण मूर्ति के बेटे 
  • रोहिणी निलकेनी, नंदन निलकेनी की पत्नि 
  • आमिर खान
  • पिरोजशा गोदरेज, आदि गोदरेज के बेटे
  • किरण मजुमदार शॉ (Biocon)
  • अनु आगा
  • मनिपाल ग्रुप 
  • पिरामल Enterprises 

जय शाह ने यह बात साफ साफ कह दी है कि उनकी कंपनी ने कोई भी कानून का उल्लंघन नहीं किया ना ही अपने पिताजी के राजनीतिक रसूख का फायदा उठाया|

आपको यह समझ लेना चाहिए कि पर्दे के पीछे असली के लिए खेला जा रहा है कि एक तरफ गुजरात के व्यापारियों को यह समझाने की कोशिश हो रही है कि जीएसटी लागू होने से मोदी सरकार द्वारा आपको त्रस्त किया जा रहा है और आपके आपका नुकसान हो रहा है| दूसरी तरफ यह जताया जा रहा है कि भाजपा के प्रमुख अमित शाह के सुपुत्र जय शाह काली और मोटी कमाई कर रहे हैं इस तरह से भाजपा को बदनाम करने की साजिश गुजरातियों के बीच में बनाई जा रही है|

अब आप समझ लीजिए गुजरात के चुनाव नजदीक हैं जीतने की बात तो दूर है कांग्रेस बुरी तरह हारने वाली है लेकिन अगर बीजेपी को 2012 के मुकाबले अगर कुछ सीटें भी कमाई तो कांग्रेस इस चीज का इस्तेमाल या यह बोल दीजिए इन आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य में यह बोलकर करेगी कि अब मोदी सरकार की लोकप्रियता गिर रही है|

राजनीति में टाइमिंग का बहुत बड़ा महत्व होता है द वायर के रुप में अप्रत्यक्ष रुप से कांग्रेस ने गुजरात चुनाव के पहले जय शाह का मुद्दा उठाकर इसको राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया है| परंतु ऐसा करके उन्होंने शेर की मांद में हाथ डाल दी है| गुजरात चुनाव नजदीक है आगे आगे देखिए होता है क्या|