भारत का अभिन्न अंग कश्मीर बीते कुछ दशकों से लगातार सुलग रहा है। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों और उन्हें मदद देने वाले कश्मीर के कुछ स्थानीय निवासियों की वजह से कश्मीर लगातार अशांत हैं। क्षोभ यह भी कि भारत के पास आज कश्मीर का महज आधा हिस्सा ही है।

गिलगित और बाल्टिस्तान वाला कश्मीर का आधा हिस्सा तो पाकिस्तान के कब्जे में है। और इन सब हालात के पीछे जो कुछ अहम कारण हैं, उनमे से एक यह भी है कि जवाहरलाल नेहरू ने उस एक चिट्ठी को नजरअंदाज कर दिया था, जिसमे कश्मीर को लेकर साफ-साफ वह सब लिखा था, जो बाद में घटता चला गया। यदि नेहरू उस चिट्ठी पर ध्यान देते तो निश्चित रूप से पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा होता।

किस्सा सं अगस्त 1947 में भारत को आजादी मिलने के ठीक बाद का है। अगस्त में पाकिस्तान अलग हुआ और उसने कबीलाइयों की आड़ में अपने सैनिको को कश्मीर पर कब्ज़ा करने भेजना शुरू कर दिया। ठीक इसी समय सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कश्मीर की विस्फोटक होती स्थिति को भांप लिया। हालांकि तब वे और उनके निजी सचिव वीपी मेनन 550 से ज्यादा रियासतों के भारत विलय की बेहद पेचीदा और जटिल प्रक्रिया में लगे थे। फिर भी पटेल ने अपनी एक आँख कश्मीर पर लगाए रखी थी।

उन्होंने नेहरू को चेतावनी भरा पत्र भेजा,जिसमे लिखा था -‘कश्मीर की स्थिति दिनोंदिन खतरनाक होकर बिगड़ती जा रही है। पाकिस्तान बड़ी संख्या कश्मीर में घुसपैठियों को भेजने की तैयारी कर रहा हैं। महाराज हरिसिंह और उनका प्रशासन शायद इस खतरे को झेल पाएं, इसलिए वक़्त की जरुरत यह कहती है कि महाराजा तुरंत नेशनल कांफ्रेंस (शेख अब्दुल्ला की पार्टी और कश्मीर में महाराजा के बाद दूसरी बड़ी ताकत) से दोस्ती करें, ताकि पाकिस्तान के खिलाफ कश्मीर की जनता का समर्थन जुटाया जा सके।’

उन्होंने आगे भी लिखा कि-‘अब्दुल्ला को जेल से रिहा करने और उसके लोगों का समर्थन हासिल करने से कश्मीर के भारत में तुरंत विलय का रास्ता साफ हो सकेगा।’ अंतः में सरदार से स्पष्तः यह भी लिखा कि ‘यदि भारत की और से जरा भी देरी की गयी तो भविष्य की बड़ी समस्या बन सकती है।’

नेहरू ने पटेल के इस पत्र पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और न ही तुरंत ऐसी कोई ठोस कार्यवाई की गई, जिससे स्थितियां बिगड़ने से बचती। अंततः हालात विकट होते गए और वही हुआ जो पटेल ने कहा था। पाकिस्तान ने कबीलाइयों को कश्मीर में भेजा और मारकाट मचा दी। तब जाकर भारत ने सेना भेजी। यदि नेहरू पहले यह निर्णय ले लेते तो राजा हरिसिंह द्वारा पूर्ण विलय के चलते पूरा कश्मीर भारत के पास होता।