भारतीय संस्कृति और परंपरा के नाम पर देश ने काफी कुछ झेला है| जहां एक तरफ आज देश का एक लाल पाकिस्तानी जेलों में कैद होकर अमानवीय तकलीफ़ें सह रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ परंपरा और संस्कृति की दुहाई देकर हमारी विदेश मंत्री उन्हीं पाकिस्तानी लोगों को मेडिकल वीजा दिलवा रहे हैं| यहां सुषमा स्वराज जी से कुछ तीखे कब सवाल करना बहुत ज़रूरी है।

2016 से हमारे एक होनहार नौजवान कुलभूषण जाधव को जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार कर लिया| उन्होंने उस पर बलूचिस्तान एवं कराची में राजनीतिक अस्थिरता और पाकिस्तान के खिलाफ ग्रह युद्ध छिड़वानें की साजिश में गिरफ्तार किया| अमानवीय व्यवहार और तरह तरह की यातनाएं कुलभूषण को दी गई|

जब यह मामला तूल पकड़ा तो इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत ने इस पर अपील की| विश्व न्यायालय में भारत की ओर से हरीश साल्वे जी ने यह केस को काफी अच्छे ढंग से पेश किया और अंत में भारत की जीत हुई| इसे एक कूटनीतिक जीत भी कहा जाए तो सही होगा| परंतु आतंकवाद और कट्टर इस्लाम धर्म को मानने वाले पाकिस्तान से आप क्या उम्मीद रख सकते हैं उन्होंने इस न्यायालय के फैसले को ठुकरा दिया।

जब काफी  मुशकिलो के बाद कुलभूषन को उसके परीवार से मिलने दिया गया तों पकिस्तानी हुकुमारानो ने कोई भी कसर नहीं छोडी उनके पत्नी और माँ को बेईइज्ज़त  करने मैं| उनके मंगलसुत्र और चप्पल  उतार  दिये गये, ऐसा  करने का वजह इस्कालामिक कानून कहा गया वहां कुलभूषन जाधव को केवल  अंग्रेजी  मैं बात करने की अनुमती मिली थी| जब कुलभूषन ने अपने माँ को बिना चूरी और मंगल सुत्र  के देखा तों उसने सबसे पहले अपने पिता का हाल पुछा| चलिये मान लेता हु की यह सब  उस देश का कानून हे|

तों सुषमाजी यह बता दिजिये दूष्मन को मेडिकल विसा देना इतना ज़रूरी है?  मान लिया अंतराष्ट्रीय कानुन  की वजह  से शायद  आप कुलभूषन को भारत नहीं ला सकते होंगे| परंतु हे विसा माता  सुषमा देवी दुनिया का कौन  सा नियम आपको सांप और सपोलो को पालने  और प्यार दिखाने पे मजबूर कर रहा है?

क्या कुलभूषन जैसा हालात आपके या आपके  परिवार वालो के साथ हुआ होता  तों भी आप ऐसी हमदर्दी दिखाती??