वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में टैक्स स्लैब में भले ही कटौती नहीं की, लेकिन नौकरी करने वालों को राहत देने के नाम पर 40,000 रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन का ऐलान किया था। 12 साल पुरानी टैक्स व्यवस्था एक अप्रैल 2018 से लागू हो गई। हालांकि, 15000 रुपए के मेडिकल रीइंबर्समेंट की सुविधा खत्म हो जाएगी।

साथ ही नए नियम के तहत 19200 रुपए के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर भी छूट खत्म की गई है। इस तरह स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत अधिकतम 5800 रुपए की छूट मिलेगी। हालांकि, स्टैंडर्ड डिडक्शन को लेकर करदाता के मन में कई सवाल हैं। इन्हीं सवालों के जवाब देते हुए टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन से नौकरीपेशा लोगों को बड़ा फायदा मिल सकता है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन उसी एकमुश्त रकम को कहा जाता है जिसे वेतन से हुई कुल कमाई में से घटा दिया जाता है और उसके बाद टैक्सेबल इनकम का कैलकुलेशन किया जाता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की वापसी से वेतनभोगी वर्ग को सलाहकारों, स्वरोजगार वालों और फ्रीलांसरों के बराबर खड़ा कर दिया गया, जिन्हें कमाई के लिए किए गए खर्च पर टैक्स डिडक्शन की छूट मिलती है।

मेडिकल रीइंबर्समेंट और ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट वापस लेने से स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू होने के बावजूद सैलरीड क्लास को महज 5,800 रुपए पर टैक्स कटौती का फायदा होगा। हालांकि, किसको कितना फायदा मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह कौन से टैक्स स्लैब में आता है।

आदर्श स्थिति में 5% टैक्स स्लैब में आने वाले को 290 रुपए, 20% टैक्स स्लैब में आने वाले को 1160 रुपए और 30% टैक्स स्लैब में आने वाले को 1740 रुपए का फायदा होगा। हालांकि, 5 लाख तक की सालाना आय वालों को छोड़ दें तो ज्यादातर मामलों में यह फायदा भी नहीं मिलने वाला है। इसकी वजह है इनकम टैक्स पर सेस का 3 फीसदी से बढ़कर 4% होना।

स्टैंडर्ड डिडक्शन से जो फायदा मिलेगा, इनकम टैक्स पर बढ़े हुए सेस की वजह से वह कम होता जाएगा या फिर अधिक टैक्स देनदारी के मामले में नुकसान ही होगा।

स्टैंडर्ड डिडक्शन की वापसी से पेंशनभोगी वर्ग को सीधा फायदा पहुंचा है। पहले उन्हें ट्रांसपोर्ट अलाउंस (परिवहन भत्ता) और चिकित्सा पर विभिन्न खर्चों (मिसलेनियस मेडिकल एक्सपेंसेज) का रीइंबर्समेंट नहीं मिला करता था। लेकिन, नए फैसले के दायरे में पेंशनर्स भी चुके हैं जिससे उनके टैक्सेबल इनकम में 40,000 रुपए की और कटौती हो जाएगी। मतलब साफ है कि अब उनका टैक्सेबल इनकम 40,000 रुपए कम हो जाएगा, जिसका सीधा लाभ टैक्स सेविंग्स के रूप में होगा।

पी. चिदंबरम ने बतौर वित्त मंत्री वित्त वर्ष 2005-06 के बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन खत्म करने का ऐलान किया था। तब स्टैंडर्ड इनकम में 30,000 रुपए या आय का 40% जो भी कम हो, वही रकम तय थी. तब 75,000 रुपए से 5 लाख रुपए की सालाना कमाई वालों को ही इसका लाभ मिलता था. 5 लाख रुपए से ज्यादा के एनुअल इनकम पर 20,000 रुपए का ही स्टैंडर्ड डिडक्शन ही मान्य था।