यह न सिर्फ भारत, बल्कि विश्व में पहली बार हुआ। इससे निश्चित ही भारत की रक्षा क्षमता को अभूतपूर्व शक्ति मिली हैं। रक्षा क्षेत्र में इस अत्यंत महत्वपूर्ण सफलता पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो टिपण्णी की, उसमे पुरे राष्ट्र के गौरव एवं प्रसनत्ता की अभिव्यक्ति हुई। उन्होंने कहा -“भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई से ब्रह्मोस  परिक्षण कर भारत ने विश्व रिकॉर्ड बनाया हैं।”

ब्रह्मोस दुनिया की सबसे भारी मिसाइलों में से एक हैं। यह समुद्र में जहाजों पर सबसे तेज गति से हमला करने में सक्षम प्रक्षेपास्त्रों में भी एक है। इसलिए इस मिसाइल को भारतीय वायुसेना और नौसेना की विशेष शक्ति के रूप में देखा जाता हैं। ताजा परीक्षण के लिए हल्के ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र का उपयोग किया गया। उसका वजन 2.4 टन था, जबकि इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का वजन सामान्यतः 2.9 टन होता हैं। दो इंजन वाले सुखोई -30 एमकेआई लड़ाकू विमान और ब्रह्मोस की जोड़ी को घातक युग्म के रूप में देखा गया हैं।

सुखोई लड़ाकू विमान पहले से ही भारतीय वायुसेना की एक प्रमुख ताकत है अब इसमें ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता भी जुड़ गयी हैं। ब्रह्मोस मिसाइल बहुत कम उचाई पर उड़ान भरती है इसलिए यह राडार की पकड़ में नहीं आती। इसका पहला सफल परीक्षण 12 जून 2001 को हुआ था। इसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है।

इसका नाम दोनों देशो में स्थित नदियों (ब्रह्मपुत्र और मस्कवा) को मिलकर रखा गया हैं। ब्रह्मोस जो पहले ही भारतीय वायुसेना और नौसेना को सौपा जा चूका है। इसकी क्षमता को देखते हुए कई देश इसे भारत से खरीदने को इच्छुक हैं, भारत अब एमटीसीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कण्ट्रोल रिजीम) का सदस्य बन चूका है।

इसलिए इस करार के तहत स्वीकृत नियमो का पालन करते हुए वह मिसाइल तकनीक की क्षमता बढ़ाने और उसे दूसरे देशो को बेचने की स्थिति में हैं। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए पिछले साल भारत और रूस ने इसकी क्षमता बढ़ाने का फैसला किया था।

ब्रह्मोस के प्रति दिलचस्पी का एक बड़ा कारण यह भी है कि ये मिसाइल थल, वायु, और जल- तीनो सेनाओ के लिए उपयोगी हैं। पिछले मार्च में 450 किलोमीटर तक मार की क्षमता वाले इसके जमीनी संस्करण का सफल परीक्षण हुआ। अब 800 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाले संस्करण पर काम चल रहा है आशा हैं कि अगले दो साल में उसका परीक्षण संभव हो जायेगा।

जानकारों में आम राय यह है कि भारत के हाथ में इस मिसाइल के जरिए उतनी दुरी तक मार करने की क्षमता आने का मतलब चीन के अतिरिक्त सिरदर्द पढ़िए होना होगा। साफ है कि भारत की रक्षा तैयारियां अब पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी ध्यान में रखकर की जा रही हैं।

दरअसल जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद से रक्षा प्राथमिकता का क्षेत्र बना है। कह सकते है कि उसके परिणाम तीव्र गति से सामने आने लगे हैं। इससे जहाँ देश में सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है, वहीँ अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर भारत का रुतबा भी बड़ा है।