फिल्म स्टार या बॉलीवुड से मैं कभी प्रभावित नहीं रहा| मुझे शुरु से ही यह बॉलीवुड वाले काफी दो मुंहे और ढोंगी लगते थे| परंतु कुछ सितारे जरूर ऐसे थे जिनकी मैं कुछ हद तक इज्जत करता हूं| माननीय शत्रुघ्न सिन्हा भी उन में से एक है| उनकी वो अदाकारी, डायलॉग डिलीवरी “खामोश” बोलने वाला अंदाज़ और रोल सिलेक्शन से मैं कुछ हद तक जरुर प्रभावित रहा हूं|

शत्रुघ्न सिन्हा बॉलीवुड के उन सितारों में से एक हैं जिन्होंने राजनीति में कदम रखते भी काफी इज्जत और नाम कमाई थी| वाजपेई जी की कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्रालय एवं शिपिंग मंत्रालय संभाल चुके हैं। बिल्कुल साफ सुथरी छवि थी| बॉलीवुड के एक फेमस एक्टर होने के बावजूद भी कभी ऐसा नहीं लगा कि उन्होंने राजनीति में कोई बॉलिवुड के ग्लैमर का अंदाज दिखाया|

परंतु 2014 आते आते, आडवाणी कैंप के माने जाने वाले शत्रुघ्न जी का अंदाज बदल गया| वह घोर मोदी विरोध के शिकार हो गए| क्योंकि मैं एक मोदी का कट्टर समर्थक हूं मुझे यह बात पसंद नहीं आई| परंतु फिर भी मैं शत्रुघन सिन्हा की इज्जत करता था क्योंकि वह चाहते तो एक मंझे हुए राजनेता की तरह अडवाणी कैंप से मोदी कैंप में दाखिल हो जाते और मोदी के नाम की बांसुरी बजाते और कोई ना कोई मंत्रालय प्राप्त कर लेते| परंतु बिल्कुल भी ऐसा नहीं हुआ, जिस तरह की छवि मैंने शत्रुघ्न सिन्हा की काफी सारे बॉलीवुड मूवी में देखी है उसी तरह से रियल लाइफ में भी वह अपने उसूलों और आदर्श पर डटे रहें और मोदी विरोध करते गए मुझे यह बात कुछ हद तक उनकी अच्छी लगने लगी, चलो भाई बंदा अपने एक बनाए हुए उसूल पर तो कायम है|

बिहार में वर्ष 2015 में जब BJP हारी, तो उस हार का कुछ जिम्मेदार शत्रुघ्न सिन्हा को भी जाता है क्योंकि वह उलूल जूलूल बयान देकर, भाजपा की छवि बिगाड़ रहे थे| परंतु फिर भी मैं उनकी इज्जत करता रहा क्योंकि यह उनका और उनके पार्टी का अंदरुनी मामला था| नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की जुगलबंदी को भी वह खूब आशीर्वाद देते रहे| मैंने सोचा कि नीतीश कुमार एक विकासवादी पुरुष हैं और ऐसी सरकार को अगर शत्रुघ्न सिन्हा आशीर्वाद दे रहे हैं तो चलिए कुछ हद तक सही होगा|

राजनीतिक बिसात बदल गई जुलाई 2017 में अचानक नीतीश कुमार जी भाजपा के समर्थन द्वारा लालू यादव को पछाड़ गए| यहां हमारे शत्रुघन भैया के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई अब वह किस मुंह से नीतीश कुमार का साथ देते आखिर नीतीश कुमार जी तो बेवफा निकले|

मैं समझ चुका था कि मोदी जी और अमित शाह और वर्तमान के भाजपा के उच्च नेताओं ने शत्रुघ्न सिन्हा की हालत उस कुत्ते की तरह कर दी है जो सिर्फ भौंक रहा है और किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता| एक मोदी समर्थक होने के नाते मुझे बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन फिर भी किसी जमाने में मैं शत्रुघ्न सिन्हा जी का प्रशंसक हुआ करता था| मुझे काफी आहत होती थी कि उनके साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है, लेकिन करें भी क्या यह राजनीति है|

परंतु जब 1994 के चारा घोटाले में लालू यादव को 3.50 साल की कैद की सजा सुनाई गई, तो इस पर रोते बिलखते हुए शत्रुघ्न सिन्हा का यह ट्वीट मेरे मन में उनके लिए सारी इज्जत मिट्टी में मिल गई|

मेरा उनसे कुछ तीखा सवाल है| सिन्हा साहब मोदी विरोध ने आपको क्या इतना अंधा बना दिया कि आप यह भूल गए कि 950 करोड़ का घपला वर्ष 1994-95 में बिहार जैसी पिछड़े इलाके में लालू यादव ने किया? जहां की जनता भूखमरी और बीमारियों का शिकार बन रही थी वहां एक गुंडा राज स्थापित कर के गुंडों के नेता लालू यादव ने एक जंगलराज कायम कर दिया था? क्या आपने मोदी विरोध में इन सब बातों को भुला दिया? कहां गई वह आपकी फिल्मी हीरो वाली छवि जहां आप अपने उसूलों पर कायम रहे थे?

आज आपको उस लालू यादव पर सहानुभूति लग रही है जिसने बिहार की जनता को तिल तिल मारा और जिस का विरोध करते हुए कभी आप भाजपा में एक उच्च पद पर विराजमान हुआ करते थे? सिर्फ कुछ राजनीतिक और पर्सनल मतभेद के कारण आपको मोदी स्वीकार नहीं, परंतु बहुत ही आश्चर्यजनक परिस्थिति है कि आपको बिहार के राक्षस माने जाने वाले, अराजकता के देवता लालू यादव से इतनी सहानुभूति हो गई|

जिस लालू यादव को आप गरीबों का मसीहा बता रहे हैं, उसकी तो उल्टी गिनती शुरु हो गई है| क्योंकि जिस गरीब को उस ने लूटा है आज उसी की बद्दुआ उसको जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है| आप अपनी सहानुभूति अपने पास रखिए| और हो सके तो अब भोंकते हुए कुत्ते के जैसे भाजपा में मत रहिए लालू यादव के पैर के तलवे चाटते रहिये।