एक रोचक घटना स्वामी जी के जीवन से जुड़ी हुई। यह बात उस समय की है जब स्वामीजी यूरोप की यात्रा पर थे,और स्वामी जी पुरे यूरोप में हिंदुत्व की ज्योत फैला रहे थे।

उस समय पूरे यूरोप का ईसाई तबका पूरी तरह से घबरा गया था कि यदि स्वामी जी 2-4 साल और यूरोप में रहे तो पूरा यूरोप हिंदुमय हो जायेगा। वहाँ के कट्टरपंथी इसाई समुदाय तरह तरह से स्वामी जी को प्रताड़ित करने का मौका ढूढँते रहते थे, लेकिन उनमें कुछ सज्जन भी थे।

एक बार की बात है। एक सज्जन (जो की यूरोप के सबसे बड़े उद्योगपति थे) आये और स्वामी जी की बातों से बहुत प्रभावित हुए और जाते जाते स्वामी जी से बोले, “महाराज आप इतने ज्ञानी हैं,आप क्यों इस तरह के वस्त्र पहनते हैं (ज्ञात हो स्वामी जी भगवाधारी थे)। आप अगर सूट, टाई, बेल्ट लगाये तो आप और भी अधिक सज़्ज़न लगेंगे।”

स्वामी जी उनकी बातों को सुनकर मुस्कुराये और बड़ी ही विनम्रता से बोले, “अगर कोई वस्त्र के पहनने से विनम्र हो सकता था तो पूरा यूरोप ही विनम्र होता, पूरी अमेरिका ही विनम्र होती। हम भारतवर्ष से आये हैं। हमारे हिंदुत्व में बाह्य नहीं आंतरिक सुंदरता का ज्यादा महत्व है। और वैसे भी चरित्र सुन्दर हो तो सब कुछ सुन्दर होता है..”

स्वामी जी की बातों से वो उद्योगपति इतना प्रभावित हुआ की उसने अपनी पूँजी का संपूर्ण हिस्सा दान कर जब तक स्वामी जी यूरोप में रहे उनका भक्त बना रहा।

ऐसे थे हमारे स्वामी जी।

Author: Chirag Jha(Agniveer)